डाउन सिंड्रोम और टर्नर सिंड्रोम क्या है?HealthPlanet

Posted on Fri 9th Dec 2022 : 09:46

डाउन सिंड्रोम जिसे ट्राइसोमी 21 के नाम से भी जाना जाता है, एक आनुवांशिक विकार है जो क्रोमोसोम 21 की तीसरी प्रतिलिपि के सभी या किसी भी हिस्से की उपस्थिति के कारण होता है। डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक कंडिशन है, जिसमें शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास भी काफी धीरे होता है। यह स्थिति जीवन भर के लिए रहती है, लेकिन प्रॉपर देखभाल के साथ डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) वाले लोग स्वस्थ रूप से बड़े हो सकते हैं और सामान्य तरीके से समाज में उठ बैठ सकते हैं।

आमतौर पर जन्म के समय डाउन सिंड्रोम वाले शिशुओं में कुछ विशिष्ट लक्षण होते हैं. फ्लैट चेहरा, बादाम शेप आंखें, उभरी हुई जीब, हाथों में लकीरें, सिर, कान, उंगलियां छोटी-चौड़ी होती हैं. बच्चों का कद छोटा होता है. इस बीमारी से पीड़ित बच्चे सामान्य बच्चों से अलग व्यवहार करते हैं.

इसके सामान्य लक्षण हैं जैसे हम आपको नीचे बता रहे हैं:


चेहरे के फ्लैट फीचर।
सिर का छोटा आकार।
गर्दन छोटी रह जाना।
छोटा मुंह और उभरी हुई जीभ।
मांसपेशियां कमजोर रह जाना।
दोनों पैर के अंगूठों के बीच अंतर।
चौड़ा हाथ और छोटी उंगलियां।
वजन और लंबाई औसत रूप से कम होना।



ऊपर दिए गए कुछ लक्षण हो सकते हैं। अगर आपको किसी लक्षण से परेशानी है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।


टर्नर सिंड्रोम एक अनुवांशिक सिंड्रोम है, जो कि केवल महिलाओं को प्रभावित करती है। यह गुणसूत्र की असामान्यता है, जिसमें लिंग गुणसूत्रों का एक हिस्सा या समस्त भाग अनुपस्थित या अपूर्ण होता हैं (अप्रभावित मनुष्यों में 46 गुणसूत्र हैं, जिनमें से दो यौन गुणसूत्र होते हैं)।

टर्नर सिंड्रोम जेनेटिक डिसऑर्डर की वजह से होने वाली बीमारी है, जिसका असर हमारे क्रोमोजोम पर पड़ता है। क्रोमोजोम में जीन शामिल होते हैं, जिससे डीएनए बनता है। क्रोमोजोम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके साथ ही यह हर व्यक्ति का शरीर अलग-अलग ढंग से काम करते हैं। क्रोमोजोम में किसी प्रकार का दोष कई तरह की समस्याओंं को जन्म देना है। यह समस्या गंभीर भी हो सकती है। इंसानी शरीर में क्रोमोजोम के 23 ग्रुप होते हैं, जिसमें से 23 वां क्रोमोजोम सेक्स (लिंग) का निर्धारण करता है (पुरुषों में XY और महिलाओं में XX)। टर्नर सिंड्रोम में एक X क्रोमोजोम में दोष होता है।

टर्नर सिंड्रोम के लक्षण

टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित लड़कियों का विकास धीरे-धीरे होता है और उनमें पाचन से जुड़ी दिक्कतें होती हैं। इसके अलावा, उनकी शारीरिक बनावट में भी समस्या होती है। ऐसी लड़कियों की गर्दन छोटी, सीना चौड़ा या फिर कान बड़े या छोटे हो सकते हैं। उनमें स्तन का विकास नहीं हो पाता है और कई बार गर्भधारण में समस्या भी होती है। इस सिंड्रोम की वजह से सोचने-समझने की क्षमता का विकास ठीक से नहीं हो पाता है। इनमें मानसिक रूप से कमजोर होने का खतरा होता है।

टर्नर सिंड्रोम के कारण दिल की बीमारी, किडनी की बीमारी, बाल झड़ने और सुनने की क्षमता कम होने जैसी दिक्कतें भी देखने को मिल सकती हैं। टर्नर सिंड्रोम का कोई विशेष इलाज मौजूद नहीं है इसलिए इसके कारण शरीर में दिखने वाले लक्षणों का उपचार किया जाता है।

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